खुश तो हो ना, मुझसे दूर जाकर, मुझे पागल बनाकर मेरी रातों की नींद,सुबह की धूप छीनकर खुश तो हो ना बिना मदिरा नशेरी बनाकर, लोगों से पत्थर मरवाकर मेरी वो झूठी कहानियां सुनाकर,मुझे झूठा बनाकर खुश तो हो ना मेरे अपनों का भरोसा , परायों की चुप्पी छीनकर अपने दोस्तों के हाथों मुझे बेचकर,मुझे गालियां देकर खुश तो हो ना जो बच्चे मेरे जैसा बनना चाहते थे उन्हें मुझसे दूर करके,जाने कितने के सपनों को चुर करके खुद को विक्टिम और मुझे मुजरिम बनाकर, दलीलें खुद की अदालत भी खुद ही बनाकर खुश तो हो ना -N.kumar