Posts

Showing posts from March, 2020

मेरे लब्ज

आज अजीब सा अहसास हो रहा में जिन पहलु के लिए खुद को भी खो दिया उसने आख़री पल में भी मुझे ऐसा तोफा दिया जिसे याद कर में मुस्कुरा भी नी सकता वो भी अजीब दिन था जो मुझे हर रात परेशान करती है उसकी वो बातें जिसने मुझे ये बताया की वो मुझपर कितना भरोसा करती थी और में उसपर कितना lll आखिर उसने मुझे याद भी नी रखा पता नी लोग ऐसे क्यों बन जाते हैँ उसमें इतनी भी ताकत नी होती की वो बस सच का साथ दे सके क्या चला जाता उसका अगर वो मुझे बिना जलील किये अलग हो जाती 

आज फिर तेरा नाम सुनकर दिल ने अरमान जगा ली

Image
आज फिर तेरा नाम सुनकर दिल ने अरमान जगा ली  एक पल  के सांसे थम गयी, हवाएं रुक सी गयी  आखों ने बिना बताये ही आसुओं की बरसात कर दी  होठों ने उपवास कर ली  आज फिर तेरा नाम सुनकर दिल ने दिल्लगी की सोची  वो आशिकी की बरसात याद कर ली  आवारगी की शाम याद कर ली  कही किनारों पर बैठ पहली किरण की इंतजार याद कर ली  आज फिर दिल ने तेरी बेवफाई की रात याद कर ली सुना जब आज भी हु तेरे दिल के किसी कोने में तो, हर जन्म में हु तेरी, तेरी कही ये बात याद कर ली  सुना जब तूने पूछा मेरे बारे में तो, तेरा मेरे साथ होने का अहसाह याद कर ली  आज फिर तूने याद किया सुनकर तेरे यादों से ही अपनी भूख मिटा ली  तेरे बेवफाई को भूलने को तेरी सारी वफ़ा याद कर ली  आज फिर तेरा नाम सुनकर दिल ने अरमान जगा ली  अब, तेरे लाये तुफानो को याद कर दिल ने किसी धड़कन को सम्हाला  शायद राते आगोश में लेकर लोड़ी सुनाने लगी  तू आज फिर सपने में आकर सताएगी  आज फिर दिल तेरे साथ जीने की शायद अरमान जगा ली   

किसकी मर्जी

आखिर क्यों हर रोज खुद को इतनी तख़लीफ़ में देता  आखिर क्यों होठों से मुस्कान आखों से चुपके  आंसू बहाता  आखिर किसकी है ये मर्जी  आखिर क्यों औरों तरह में नहीं रोता  क्यों रिश्तों के लिए इतना है में सहता  आखिर किसकी है ये मर्जी  आखिर क्यों में अपने सपनो को सहमे सहमे पूरा करने की कोसिस करता  क्यों  कहर बनकर खुदा भी मुझपर ही बरसता आखिर किसकी है ये मर्जी  अपनों के ताने सुनकर भी क्यों जबरन में मुस्कुराता  आखिर क्यों अपने अनोखे अंदाज में दर्दो को आसूं बना में बहाता  क्या ये मर्जी है मेरी या यही मर्जी है मेरे  अपनों की lllllll  

परियों की उड़ान (बेटियों को पारियां कहती है दुनियां पर अमीर जादों की बिगड़ी औलादों से तुलना कर उनके उड़ने का हक भी छीन लेती है दुनियां)

Image
मुझे नी लगता कि मैं ये सब कहने या किसी और की सोच पढ़ने के काबिल हूं फिर भी में लिख रहा हूं इसलिए क्योंकि ये पारियां अपने सपनों को दुनियां के मजाक उड़ाने की डर से भी अपने ही अंदर दफ्न कर देती है । इनमें भी कुछ ऐसी होती हैं जिन्हें ये लगता है अगर किसी ने उन्हें उनके कपड़े के बारे में कुछ कह दिया तो उनकी आजादी छीन रही है ये वही लोग हैं जिन्हें घर से बाहर जाने का मौका मिलता है । इन्हें ये बात पता नी की उन परियों की सपनों को रौंद रही जो कच्चे घर के आसरे से उपर उड़ते ऐरोप्लेन को देख कर खुली आखों उसके साथ खुद को उड़ाती है पर फिर अपने आस पास की कच्ची दीवारों को देख कर सहम जाती है ये सोच कर अगर में अपना हक मांगुंगी तो लोग कहेंगे ये भी खुद को अमीर जादी समझती है फिर मुझे मेरी औकात बताएंगे l क्या ये सच नी की आज भी गरीब घरों की लड़कियों को सपने देखने की आजादी नी वो सपने भी सहम सहम के देखती