मेरे लब्ज

आज अजीब सा अहसास हो रहा में जिन पहलु के लिए खुद को भी खो दिया उसने आख़री पल में भी मुझे ऐसा तोफा दिया जिसे याद कर में मुस्कुरा भी नी सकता वो भी अजीब दिन था जो मुझे हर रात परेशान करती है उसकी वो बातें जिसने मुझे ये बताया की वो मुझपर कितना भरोसा करती थी और में उसपर कितना lll
आखिर उसने मुझे याद भी नी रखा पता नी लोग ऐसे क्यों बन जाते हैँ उसमें इतनी भी ताकत नी होती की वो बस सच का साथ दे सके क्या चला जाता उसका अगर वो मुझे बिना जलील किये अलग हो जाती 

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