दीवानी सी, मस्तानी सी, दिखती वो बड़ी सयानी सी शांत सा चेहरा, चंचल सी आँखें, रहती वो नदियों की निर्मल धारा सी वो लड़की मस्तानी पतझड़ से उसका कोई वास्ता नहीं, वो तो है सावन की रानी आँधी उसकी पहचान नहीं, वो मंद मंद चलती ठंडी हवा की झोकों सी वो लड़की है अनजानी अंधेरों से उसका कोई वास्ता नहीं, वो पूर्णिमा के चाँद की रोशनी या शायद रातों की गौरव चांदनी वो लड़की है कितनी दीवानी कितनों की होगी वो सपनों की रानी, पर वो कहती मैं नहीं किसी की दीवानी, मुझे तो लगती ये सिर्फ एक कहानी वो लड़की है कितनी प्यारी चश्मे में दिखती हिस्ट्री वाली मिस जैसी, बिना चश्मे दिखती वो इंग्लिश वाली मैडम है कितनी सोनी, कुड़ी वो सादगी में लगती है नूर, तभी तो रखती इतना गुरुर थोड़ी कच्ची, थोड़ी पक्की, थोड़ी अच्छी, थोड़ी बुरी पर दिखती है वो मिर्ची सी तीखी थोड़ी खट्टी, थोड़ी मिट्ठी, थोड़ी झूठी, थोड़ी सी है वो सच्ची पर जो भी है वो दिल की है बड़ी अच्छी वो लड़की पगली, दी...