परियों की उड़ान (बेटियों को पारियां कहती है दुनियां पर अमीर जादों की बिगड़ी औलादों से तुलना कर उनके उड़ने का हक भी छीन लेती है दुनियां)

मुझे नी लगता कि मैं ये सब कहने या किसी और की सोच पढ़ने के काबिल हूं फिर भी में लिख रहा हूं इसलिए क्योंकि ये पारियां अपने सपनों को दुनियां के मजाक उड़ाने की डर से भी अपने ही अंदर दफ्न कर देती है ।
इनमें भी कुछ ऐसी होती हैं जिन्हें ये लगता है अगर किसी ने उन्हें उनके कपड़े के बारे में कुछ कह दिया तो उनकी आजादी छीन रही है ये वही लोग हैं जिन्हें घर से बाहर जाने का मौका मिलता है । इन्हें ये बात पता नी की उन परियों की सपनों को रौंद रही जो कच्चे घर के आसरे से उपर उड़ते ऐरोप्लेन को देख कर खुली आखों उसके साथ खुद को उड़ाती है पर फिर अपने आस पास की कच्ची दीवारों को देख कर सहम जाती है ये सोच कर अगर में अपना हक मांगुंगी तो लोग कहेंगे ये भी खुद को अमीर जादी समझती है फिर मुझे मेरी औकात बताएंगे l क्या ये सच नी की आज भी गरीब घरों की लड़कियों को सपने देखने की आजादी नी वो सपने भी सहम सहम के देखती 

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