"ओ खुदा "
ओ खुदा,
ना माँगा कभी तुझसे कुछ, आज एक दुआ मांगता हूँ,
क्यों रहता है तू उससे ख़फ़ा उससे रजा मंदी की रजा मांगता हूँ l
तेरे लाये हर शैलाब को मुस्कुरा कर झेलता हूँ तो बचाये आसुओं की कीमत में उसकी हसीं मांगता हूँ l
कभी ना तुझसे रूठा हूँ, तो उसके रूठने पर मनाने की पहल तेरी हो, ये दुआ मांगता हूँ l
दे ना दर्द जितना देगा तू मुझे बदले में उसकी आजादी की हवा मांगता हूँ l
ओ खुदा,
ना माँगा कभी तुझसे कुछ, आज एक दुआ मांगता हूँ, क्यों रहता है तू उससे ख़फ़ा उससे रजा मंदी की रजा मांगता हूँ l
----------Enigma
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