जिंदगी एक सफर... 🙏🙏🙏

एक वक़्त था...
सबकी बातें सुनना पसंद था...
फिर वक़्त ने जिद का रूप लिया...
अब अपनी बातें हर सूरत में मनवाना पसंद था..
जिंदगी कुछ और आगे बढ़ी...
हर बात की सफाई देने लगा था..
जिंदगी की कुछ सिलवटें ने..
थोड़ा जिम्मेदार बनाया...
अब अपनी गलती की जिम्मेदारी लेने लगा था..
कारवां चलता गया..
कुछ अपने पराये हो गये.. कुछ पराये अपने होने लगे...
अब पराये अपनों के बीच अनजाने शहर में था..
समय चलता गया...
कुछ पराये जो अपने थे फिर पराये हो गये..
अपने फिर अपने लगने लगने लगे..
अब मैं उलझन में था...
मैं अपनों परायों की इस भीड़ में अकेला होता चला गया...
अब मैं, अपने जज़्बात शब्दों के सहारे पन्नों पर उकेरता हूँ... 🥰
      -Enigma
Enigma 

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